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            <![CDATA[ पूनम मित्तल - प्रबंधन निदेशक, मेपल प्रेस ]]>
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            <![CDATA[ https://www.frontlist.in/public/panama-matatal-parabthhana-nathashaka-mapal-parasa ]]>
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        <description>
            <![CDATA[ <p><strong>प्रकाशक के बारे में</strong></p><p>श्रीमती पूनम मित्तल मेपल प्रेस प्रा॰ लिमिटेड की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। वे प्रकाशन के क्षेत्र में कई वर्षों से कार्यरत है। वे छप्ज ैनतंजीांस से इंजीनियरिंग स्नातक है एंवम ळण्ज्ञण् च्नइसपेीपदह ;च्द्ध स्जक की डायरेक्टर भी रह चुकी हैं।<br>सोशल म्दजतमचतमदमनत होने के नाते वे शिक्षा के क्षेत्र में सस्ती व अच्छी किताबें प्रकाशित करके अपना योगदान देना चाहती है।</p><p><strong>फ्रंटलिस्टः</strong> मेपल प्रेस ने हिन्दी साहित्य को बढ़ावा देने के लिए नए जमाने के हिन्दी लेखकों को कैसे एक मंच प्रदान किया है?</p><p><strong>पूनमः</strong> मेपल प्रेस ने चइसपेीपदहण्बवउ नाम से एक ई-कार्मस पोर्टल बनाया है जिसमें नए लेखकों को अपनी पुस्तकों को प्रकाशित करवाने के लिए पुस्तकों का प्री-आर्डर देना होता है। इसके लिए न तो उन्हें अधिक प्रतीक्षा करनी होती है और न ही उनकी कृति के अस्वीकृत होने का भय होता है। मेपल प्रेस का पूरा प्रयत्न नयी कृतियों को प्रकाशित करने का होता है।</p><p><strong>फ्रंटलिस्टः </strong>मेपल प्रेस ने हिन्दी और अंग्रेजी पुस्तकों के बीच पाठकों के आधार में क्या अंतर अनुभव किया है? युवा पीढ़ी के बीच हिन्दी पाठकों की संख्या बढ़ाने के लिए हम कौन से दृष्टिकोण अपना सकते हैं?&nbsp;</p><p><strong>पूनमः</strong> हिन्दी के पाठकों की संख्या अंग्रेजी के पाठकों से काफी कम है फलतः पुस्तकों (हिन्दी) की लोकप्रियता पर प्रभाव पड़ता है। हिन्दी पुस्तकों की ओर पुस्तकालयों का रुझान बढ़ा है। प्रेरणादायक तथा स्वप्रेरित करने वाली पुस्तकों ;उवजपअंजपवदंस इववोए ेमसि ीमसच इववोद्ध की माँग अधिक है। युवा पीढ़ी में कविता एवं कहानियाँ लिखने का जोश पाठकों के जोश से अधिक है। टी.वी. और मोबाईल अधिकांश समय ले लेता है। आज की पीढ़ी के बीच हिन्दी का पठन बढ़ाने के लिए पुस्तकों को रुचिकर, आकर्षक, रंगीन तथा ग्राह्य बनाना होगा।<br>प्राथमिक शिक्षा हिन्दी में देनी होगी जिसके लिए सरकार कार्यरत है।</p><p><strong>फ्रंटलिस्टः</strong> अधिकांश माता-पिता पसंद करते हैं कि उनके बच्चे अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में सीखें, जो हिन्दी पुस्तक प्रकाशन को अस्वीकार करता है। यह हिन्दी प्रकाशकों को कैसे प्रभावित करता है?</p><p><strong>पूनमः</strong> अभिभावक यह समझते हैं कि आगे बढ़ने के लिए अंग्रेजी ही एकमात्र रास्ता है इसीलिए वे बोलचाल तथा पढ़ने में बच्चों को अंग्रेजी की ओर ही प्रोत्साहित करते हैं। परिणामस्वरूप हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकें कम बिकती हैं। हिन्दी पुस्तकों को पढ़ने में कम रुचि होने के कारण प्रकाशक भी नए लेखकों की पुस्तकें प्रिंट नहीं करना चाहते हैं।</p><p><strong>फ्रंटलिस्टः</strong> एक प्रकाशक होने के नाते, जब आपने हिन्दी पुस्तकों का प्रकाशन शुरू किया तो आपको किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा? क्या आपको लगता है कि आने वाले वर्षों में हिन्दी प्रकाशन उद्योग फल-फूलेगा?</p><p><strong>पूनमः</strong> जब हमने इस प्रकाशन को प्रारम्भ किया तो हमारा यही उद्देश्य था कि हम हिन्दी में अच्छी पुस्तकें प्रकाशित करें। कागज, प्रिंटिंग, चित्रण, विषयवस्तु सभी को हमने ध्यान में रखा। पाठकों को आकर्षित करने के लिए हिन्दी की पुस्तकों का आकर्षक होना भी अत्यावश्यक था। प्रकाशन के बाद उन्हें बेचना भी बहुत मुश्किल था। 1100 का प्रिंट रन भी बिक नहीं पाता था पर हमने साहस नहीं छोड़ा और लगे रहे। हमने हिन्दी में काफी पुस्तकें प्रकाशित करी हैं।<br>हमारा पूरा विश्वास है कि आने वाले वर्षों में हमारी सरकार की नई नीतियों के कारण हिन्दी प्रकाशन उद्योग एक नई ऊँचाइयों को छूएगा और पाठकों की संख्या भी बढ़ेगी।</p><p><strong>फ्रंटलिस्टः</strong> क्या आपको लगता है कि हिन्दी प्रकाशक छम् 2022 में शैक्षिक क्षेत्र में लाए जाने वाले परिवर्तनों को अपनाने में सक्षम होंगे?</p><p><strong>पूनमः</strong> छम् 2022 में शैक्षिक क्षेत्र में हिन्दी प्रकाशकों का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा देने की योजना से हिन्दी का प्रचार-प्रसार बढ़ेगा। हिन्दी प्रकाशक अच्छी और आकर्षक पुस्तकें छापकर बच्चों तक पहुँचा पाएँगे। पाठकों को एक बार आनंद आने लगेगा तो वे उससे अलग नहीं हो पाएँगे।<br>हिन्दी भाषा के लेखकों, कवियों का शिक्षा, सामाजिक और राष्ट्रीय जागृति में बहुत बड़ा योगदान रहा है। हम अपनी भाषा की पुस्तकों को लोकप्रिय बनाएँ यही हमारी चेष्टा रहेगी।</p><p><strong>फ्रंटलिस्टः</strong> हिन्दी साहित्य उत्सवों ने हिन्दी पुस्तकों और उनके लेखकों के विपणन को और अधिक सुविधाजनक बना दिया है। इस पर आपकी क्या राय है?</p><p><strong>पूनमः</strong> हिन्दी साहित्य उत्सव एक ऐसा मंच है जहाँ लेखक अपनी पुस्तकों का प्रमोचन ;संनदबीद्ध करते हैं, गोष्ठियों होती हैं, अपनी बात करने का लेखकों को अवसर मिलता है। साहित्य लेखक या पठन में रुचि रखने वाले ऐसे उत्सव की ब्रेसब्री से प्रतीक्षा करते हैं।</p><p><strong>फ्रंटलिस्टः </strong>अंग्रेजी साहित्य ने आज की दुनिया में सभी भाषाओं को पछाड़ दिया है। हम लोगों को हिन्दी किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग कैसे कर सकते हैं?</p><p><strong>पूनमः</strong> अंग्रेजी के वैश्विक भाषा होने के कारण अंग्रेजी पाठकों की संख्या अधिक है। आर्थिक रूप से सम्पन्न होने के कारण उनमें पुस्तकें खरीदने की क्षमता भी अधिक है। विदेशों में लोगों में किताब पढ़ने में अधिक रूचि होती है। यहाँ पर लोग किताब कम पढ़ते है।<br>इसका यह अर्थ कदापि नहीं कि अन्य भाषाओं में पुस्तकें पनप नहीं सकतीं। दूरदर्शन तथा सोशल मीडिया में आज हिन्दी का चलन बढ़ रहा है। हिन्दी की पुस्तकों को उचित मूल्य पर आकर्षक स्वरूप में उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। इन पुस्तकों के प्रचार एवं प्रसार में सोशल मीडिया बहुत अधिक उपयोगी सिद्ध होगी। इसकी पहुँच बहुत दूर-दूर तक होती है। जागरूकता अवश्य आएगी।</p><p><strong>फ्रंटलिस्टः</strong> हिन्दी अनुवादित शीर्षक मूल हिन्दी शीर्षकों से अधिक लोकप्रिय क्यों हैं? प्रकाशक के दृष्टिकोण से उत्तर दें।</p><p><strong>पूनमः</strong> इसका एक ही उत्तर है। हिन्दी की अंग्रेजी में अनुवादित पुस्तकों की लोकप्रियता का श्रेय पाठकों की संख्या को जाता है। अंग्रेजी पाठक पूरी दुनिया में हैं जो कि भारत के हिन्दी पाठक वर्ग से कहीं अधिक हैं। हिन्दी पाठकों का बाजार बहुत की सीमित है। अंग्रेजी में अनुवादित पुस्तक की प्रसिद्धि का यही मूल कारण है।<br>&nbsp;</p> ]]>
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        <language>en</language>
        <pubDate>Sun, 09 04, 2022 10:00 am</pubDate>
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                <![CDATA[ पूनम मित्तल - प्रबंधन निदेशक, मेपल प्रेस ]]>
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            <link><![CDATA[ https://www.frontlist.in/public/panama-matatal-parabthhana-nathashaka-mapal-parasa ]]></link>
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                <![CDATA[ <p><strong>प्रकाशक के बारे में</strong></p><p>श्रीमती पूनम मित्तल मेपल प्रेस प्रा॰ लिमिटेड की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। वे प्रकाशन के क्षेत्र में कई वर्षों से कार्यरत है। वे छप्ज ैनतंजीांस से इंजीनियरिंग स्नातक है एंवम ळण्ज्ञण् च्नइसपेीपदह ;च्द्ध स्जक की डायरेक्टर भी रह चुकी हैं।<br>सोशल म्दजतमचतमदमनत होने के नाते वे शिक्षा के क्षेत्र में सस्ती व अच्छी किताबें प्रकाशित करके अपना योगदान देना चाहती है।</p><p><strong>फ्रंटलिस्टः</strong> मेपल प्रेस ने हिन्दी साहित्य को बढ़ावा देने के लिए नए जमाने के हिन्दी लेखकों को कैसे एक मंच प्रदान किया है?</p><p><strong>पूनमः</strong> मेपल प्रेस ने चइसपेीपदहण्बवउ नाम से एक ई-कार्मस पोर्टल बनाया है जिसमें नए लेखकों को अपनी पुस्तकों को प्रकाशित करवाने के लिए पुस्तकों का प्री-आर्डर देना होता है। इसके लिए न तो उन्हें अधिक प्रतीक्षा करनी होती है और न ही उनकी कृति के अस्वीकृत होने का भय होता है। मेपल प्रेस का पूरा प्रयत्न नयी कृतियों को प्रकाशित करने का होता है।</p><p><strong>फ्रंटलिस्टः </strong>मेपल प्रेस ने हिन्दी और अंग्रेजी पुस्तकों के बीच पाठकों के आधार में क्या अंतर अनुभव किया है? युवा पीढ़ी के बीच हिन्दी पाठकों की संख्या बढ़ाने के लिए हम कौन से दृष्टिकोण अपना सकते हैं?&nbsp;</p><p><strong>पूनमः</strong> हिन्दी के पाठकों की संख्या अंग्रेजी के पाठकों से काफी कम है फलतः पुस्तकों (हिन्दी) की लोकप्रियता पर प्रभाव पड़ता है। हिन्दी पुस्तकों की ओर पुस्तकालयों का रुझान बढ़ा है। प्रेरणादायक तथा स्वप्रेरित करने वाली पुस्तकों ;उवजपअंजपवदंस इववोए ेमसि ीमसच इववोद्ध की माँग अधिक है। युवा पीढ़ी में कविता एवं कहानियाँ लिखने का जोश पाठकों के जोश से अधिक है। टी.वी. और मोबाईल अधिकांश समय ले लेता है। आज की पीढ़ी के बीच हिन्दी का पठन बढ़ाने के लिए पुस्तकों को रुचिकर, आकर्षक, रंगीन तथा ग्राह्य बनाना होगा।<br>प्राथमिक शिक्षा हिन्दी में देनी होगी जिसके लिए सरकार कार्यरत है।</p><p><strong>फ्रंटलिस्टः</strong> अधिकांश माता-पिता पसंद करते हैं कि उनके बच्चे अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में सीखें, जो हिन्दी पुस्तक प्रकाशन को अस्वीकार करता है। यह हिन्दी प्रकाशकों को कैसे प्रभावित करता है?</p><p><strong>पूनमः</strong> अभिभावक यह समझते हैं कि आगे बढ़ने के लिए अंग्रेजी ही एकमात्र रास्ता है इसीलिए वे बोलचाल तथा पढ़ने में बच्चों को अंग्रेजी की ओर ही प्रोत्साहित करते हैं। परिणामस्वरूप हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकें कम बिकती हैं। हिन्दी पुस्तकों को पढ़ने में कम रुचि होने के कारण प्रकाशक भी नए लेखकों की पुस्तकें प्रिंट नहीं करना चाहते हैं।</p><p><strong>फ्रंटलिस्टः</strong> एक प्रकाशक होने के नाते, जब आपने हिन्दी पुस्तकों का प्रकाशन शुरू किया तो आपको किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा? क्या आपको लगता है कि आने वाले वर्षों में हिन्दी प्रकाशन उद्योग फल-फूलेगा?</p><p><strong>पूनमः</strong> जब हमने इस प्रकाशन को प्रारम्भ किया तो हमारा यही उद्देश्य था कि हम हिन्दी में अच्छी पुस्तकें प्रकाशित करें। कागज, प्रिंटिंग, चित्रण, विषयवस्तु सभी को हमने ध्यान में रखा। पाठकों को आकर्षित करने के लिए हिन्दी की पुस्तकों का आकर्षक होना भी अत्यावश्यक था। प्रकाशन के बाद उन्हें बेचना भी बहुत मुश्किल था। 1100 का प्रिंट रन भी बिक नहीं पाता था पर हमने साहस नहीं छोड़ा और लगे रहे। हमने हिन्दी में काफी पुस्तकें प्रकाशित करी हैं।<br>हमारा पूरा विश्वास है कि आने वाले वर्षों में हमारी सरकार की नई नीतियों के कारण हिन्दी प्रकाशन उद्योग एक नई ऊँचाइयों को छूएगा और पाठकों की संख्या भी बढ़ेगी।</p><p><strong>फ्रंटलिस्टः</strong> क्या आपको लगता है कि हिन्दी प्रकाशक छम् 2022 में शैक्षिक क्षेत्र में लाए जाने वाले परिवर्तनों को अपनाने में सक्षम होंगे?</p><p><strong>पूनमः</strong> छम् 2022 में शैक्षिक क्षेत्र में हिन्दी प्रकाशकों का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा देने की योजना से हिन्दी का प्रचार-प्रसार बढ़ेगा। हिन्दी प्रकाशक अच्छी और आकर्षक पुस्तकें छापकर बच्चों तक पहुँचा पाएँगे। पाठकों को एक बार आनंद आने लगेगा तो वे उससे अलग नहीं हो पाएँगे।<br>हिन्दी भाषा के लेखकों, कवियों का शिक्षा, सामाजिक और राष्ट्रीय जागृति में बहुत बड़ा योगदान रहा है। हम अपनी भाषा की पुस्तकों को लोकप्रिय बनाएँ यही हमारी चेष्टा रहेगी।</p><p><strong>फ्रंटलिस्टः</strong> हिन्दी साहित्य उत्सवों ने हिन्दी पुस्तकों और उनके लेखकों के विपणन को और अधिक सुविधाजनक बना दिया है। इस पर आपकी क्या राय है?</p><p><strong>पूनमः</strong> हिन्दी साहित्य उत्सव एक ऐसा मंच है जहाँ लेखक अपनी पुस्तकों का प्रमोचन ;संनदबीद्ध करते हैं, गोष्ठियों होती हैं, अपनी बात करने का लेखकों को अवसर मिलता है। साहित्य लेखक या पठन में रुचि रखने वाले ऐसे उत्सव की ब्रेसब्री से प्रतीक्षा करते हैं।</p><p><strong>फ्रंटलिस्टः </strong>अंग्रेजी साहित्य ने आज की दुनिया में सभी भाषाओं को पछाड़ दिया है। हम लोगों को हिन्दी किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग कैसे कर सकते हैं?</p><p><strong>पूनमः</strong> अंग्रेजी के वैश्विक भाषा होने के कारण अंग्रेजी पाठकों की संख्या अधिक है। आर्थिक रूप से सम्पन्न होने के कारण उनमें पुस्तकें खरीदने की क्षमता भी अधिक है। विदेशों में लोगों में किताब पढ़ने में अधिक रूचि होती है। यहाँ पर लोग किताब कम पढ़ते है।<br>इसका यह अर्थ कदापि नहीं कि अन्य भाषाओं में पुस्तकें पनप नहीं सकतीं। दूरदर्शन तथा सोशल मीडिया में आज हिन्दी का चलन बढ़ रहा है। हिन्दी की पुस्तकों को उचित मूल्य पर आकर्षक स्वरूप में उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। इन पुस्तकों के प्रचार एवं प्रसार में सोशल मीडिया बहुत अधिक उपयोगी सिद्ध होगी। इसकी पहुँच बहुत दूर-दूर तक होती है। जागरूकता अवश्य आएगी।</p><p><strong>फ्रंटलिस्टः</strong> हिन्दी अनुवादित शीर्षक मूल हिन्दी शीर्षकों से अधिक लोकप्रिय क्यों हैं? प्रकाशक के दृष्टिकोण से उत्तर दें।</p><p><strong>पूनमः</strong> इसका एक ही उत्तर है। हिन्दी की अंग्रेजी में अनुवादित पुस्तकों की लोकप्रियता का श्रेय पाठकों की संख्या को जाता है। अंग्रेजी पाठक पूरी दुनिया में हैं जो कि भारत के हिन्दी पाठक वर्ग से कहीं अधिक हैं। हिन्दी पाठकों का बाजार बहुत की सीमित है। अंग्रेजी में अनुवादित पुस्तक की प्रसिद्धि का यही मूल कारण है।<br>&nbsp;</p> ]]>
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            <category>Interviews</category>
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            <pubDate>Sun, 09 04, 2022 10:00 am</pubDate>
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