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            <![CDATA[ बुक लॉन्च - चल मन वृन्दावन (कॉफ़ी टेबल बुक), जिसकी मुख्य संपादक श्रीमती हेमा मालिनी (सांसद, मथुरा) और संपादक डॉ. अशोक बंसल एवं श्री सुनील आचार्य ]]>
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            <![CDATA[ https://www.frontlist.in/public/bka-lnaca-cal-mana-vanathavana-ka-tabl-bka-jasaka-makhaya-sapathaka-sharamata-hama-malna-sasatha-mathara-oura-sapathaka-da-ashaka-bsal-eva-shara-sanal-aacaraya ]]>
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        <description>
            <![CDATA[ <p><strong>पुस्तक के बारे में&nbsp;</strong></p><p>दो साल के परिश्रम के बाद कॉफ़ी टेबल बुक “चल मन वृंदावन” का प्रकाशन संभव हुआ है। मथुरा-वृंदावन की पावन भूमि युग पुरुष योगीराज श्रीकृष्ण और उनकी प्रेयसी राधा के कारण सम्पूर्ण विश्व में प्रचारित और पूजनीय है। 'श्रीमद्भागवत' जैसे पवित्र ग्रंथ में वर्णित श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न प्रेरक प्रसंगों ने जन-जन को उद्वेलित किया और इसी क्रम में महाकवि जयदेव के अद्भुत ग्रन्थ 'गीत गोविन्द' का प्रणयन हुआ। महाप्रभु चैतन्य, महाप्रभु वल्लभाचार्य जैसे समर्पित विद्वान भक्तों ने, विलुप्त हो चुके कृष्णकालीन वृंदावन व अन्य लीला-स्थलों का अपने तप और समर्पण से उद्धार किया</p><p>परिणामस्वरूप महकवि सूरदास, रसखान और मीरा सरीखे संत-कवियों ने अपनी प्रतिभा और वाणी से कृष्ण भक्ति के स्वरूप को एक नया रूप और नया अर्थ दिया। प्राचीन देवालयों का जीर्णोद्धार हुआ, नवीन पूजा स्थलों का निर्माण हुआ। इन्ही पूजास्थलों के माध्यम से कृष्णकालीन संस्कृति को नए आयामों के साथ नए कलेवर में परोसा गया। इससे ब्रज के तमाम देवालयों में आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के जीवन में आनंद और भक्ति का संचार हुआ।</p><p>इनके अतिरिक्त भगवान् बुद्ध, महावीर स्वामी, गुरुनानक, स्वामी विरजानन्द और दयानन्द सरीखे युगपुरुषों की उपस्थिति ने प्राचीन नगरी मथुरा के ऐतिहासिक महत्व को चरमोत्कर्ष पर पहुँचाया। आज ब्रज के कण-कण में हमारे पवित्र पुराणों और इतिहास को रोचक और रोमांचक कथाओं की अविरल धारा बह रही है। पुस्तक 'चल मन वृंदावन' के माध्यम से हमने तीर्थ यात्रिओं और पर्यटकों के समक्ष समग्र ब्रज की चित्रात्मक झाँकी प्रस्तुत करने का एक प्रयास किया है।</p><p><strong>डॉ. अशोक बंसल</strong></p><p><strong>संपादक</strong>&nbsp;</p><p><strong>शुभकामनायें</strong></p><p>अतीव हर्ष का विषय है कि ब्रज के विभिन्न सांस्कृतिक आयामों को एक कॉफ़ी टेबल बुक 'चल मन वृन्दावन' के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। यूँ तो ब्रज का सांस्कृतिक परिदृश्य अत्यंत विस्तृत है, किंतु इस पुस्तक को पांच विशेष खण्डों में विभाजित कर निहित सन्देश को सुस्पष्ट व सुग्राह्य बनाया गया है। इस सत्प्रयास के लिए श्रीमती हेमा मालिनी, डॉ. अशोक बंसल व उनके सहयोगी साधुवाद के पात्र हैं।</p><p>‘उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद’ के उद्देश्यों की सम्पूर्ति की दिशा में यह पुस्तक एक सशक्त पहल है।</p><p>मुझे विश्वास है कि पर्यटकों, ब्रज-रहस्य को जानने के उत्सुक श्रद्धालुओं तथा सामान्य तीर्थ यात्रिओं के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी एवं लोकप्रिय सिद्ध होगी।</p><p>कॉफ़ी टेबल बुक, 'चल मन वृन्दावन' के प्रकाशन के लिए 'उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद' की ओर से अनंत मंगलकामनाऐं ।</p><p><strong>शैलजा कांत मिश्र</strong></p><p>उपाध्यक्ष 'उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद्'</p><p><strong>कॉफ़ी टेबल बुक के आकर्षण: एक दृष्टि&nbsp;</strong></p><p><strong>ब्रज के इतिहास, संस्कृति, धर्म आदि विषयों का वर्गीकरण निम्न प्रकार किया गया है।</strong></p><p><strong>सम्पादकीय -</strong> मुख्य सम्पादक श्रीमती हेमा मालिनी ने 'चल मन वृंदावन' के प्रकाशन के विचार के जन्म, उद्देश्य और ब्रज के सांस्कृतिक महत्व को विस्तार से रेखांकित किया है।</p><p><strong>ब्रज के देवालय -&nbsp;</strong>लगभग पांच सौ वर्ष पूर्व विलुप्त वृंदावन की खोज महाप्रभु चैतन्य देव और उनके षड आचार्यों द्वारा की गई थी और फिर प्रारम्भ हुआ कृष्णकालीन वैभव को पुनः स्थापित करने का सिलसिला जो आज भी कायम है।</p><p>पुरातत्व विभाग के संरक्षण में प्राचीन मंदिरों का रखरखाव हो रहा है तो नवीन भव्य मंदिरों के निर्माण का क्रम जारी है। पुस्तक में उक्त सभी विवरण और ब्रज के प्रमुख देवालयों के निर्माण के इतिहास की चित्रात्मक व कलात्मक झांकी प्रस्तुत की गई है।</p><p><strong>ब्रज के उत्सव -&nbsp;</strong>ब्रज में राधा-कृष्ण के नाम की सर्वत्र गूँज है। 'श्रीमद्भागवत' में वर्णित श्रीकृष्ण की लीलाओं ने अनेकानेक उत्सवों को जन्म दिया है। परिणामस्वरूप, ब्रज के मंदिरों और विभिन्न स्थलों पर कृष्ण भक्तों को प्रतिदिन किसी न किसी उत्सव के नाम पर गाते, बजाते, झूमते और प्रसाद का रसास्वादन करते देखा जा सकता है। इन उत्सवों में ब्रज की होली के विभिन्न रूप तो विश्व प्रसिद्ध हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा कृष्णमय हो जाता है। चौरासी कोस की परिक्रमा, गोवर्धन परिक्रमा और यम द्वितीया के साथ रासलीला, कंस मेला आदि ब्रज के अनोखे पर्व हैं। इन उत्सवों का ऐतिहासिक विवरण पुस्तक का एक विशिष्ट आकर्षण है।</p><p><strong>ब्रज की धरोहर -</strong> विश्व के प्राचीन नगरों में मथुरा का प्रमुख स्थान है। मथुरा में महात्मा बुद्ध और महावीर स्वामी की मुलाक़ात प्रमाण के मिलते हैं। मथुरा का राजकीय संग्रहालय विगत ढाई हजार वर्षों के इतिहास, सभ्यता और संस्कृति की जीवंत पुस्तक है। इसके अतिरिक्त यहाँ की अन्य महत्वपूर्ण इमारत व स्थलों को भी इस पुस्तक में स्थान गया है।</p><p><strong>ब्रज की विभूतियाँ -&nbsp;</strong>महाप्रभु चैतन्य, महाप्रभु वल्लभाचार्य, श्रीहित हरिवंश, स्वामी हरिदास के साथ षड आचार्यों और अष्टछाप के कवियों, रसखान, मीराबाई और आधुनिक युग के स्वामी प्रभुपाद आदि के उल्लेख के बिना कृष्णकालीन ब्रज की चर्चा अधूरी है। इसके साथ, ऐसी अनेक विभूतियों को भी इस पुस्तक में स्थान दिया गया है जिन्हे पढ़कर पाठक आनंदित होता है और विस्मित भी।</p><p><strong>विविध सामग्री -&nbsp;</strong>मथुरा का पेड़ा और कृष्णकालीन मल्लविद्या पर शामिल किये गए आलेख भी कॉफ़ी टेबल बुक के अन्य आकर्षण हैं जो कृष्ण भक्तों और पर्यटकों में 'चल मन वृन्दावन' के विचार को जन्म देने के लिए पर्याप्त हैं और यही उद्देश्य है इस पुस्तक के प्रकाशन का।</p><p><strong>प्रधान मंत्री संदेश</strong></p><p>हमारी समृद्ध चिंतन परम्परा में भगवान् श्रीकृष्ण एक प्रकाश पुंज के समान है। उनकी लीलाओं की साक्षी मथुरा नगरी से जुड़े विभिन्न स्थान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। मथुरा की ऊर्जावान सांसद श्रीमती हेमा मालिनी जी के नेतृत्व में और डॉ. अशोक बंसल जी के प्रयासों से वृन्दावन, गोवर्धन, गोकुल, बरसाना व नंदगाव सहित मथुरा के विभिन्न गाँवों और कस्बों से जुड़े विभिन्न पहलुओं को लोगों तक पहुँचाने का यह प्रयास सराहनीय है।</p><p>मुझे विश्वास है कि कॉफ़ी टेबल बुक के माध्यम से ब्रज क्षेत्र की अनेक लोकोपयोगी व रोचक जानकारियां लोगों तक पहुंचेंगी।</p><p><strong>नरेन्द्र मोदी</strong></p><p><strong>प्रधानमंत्री, भारत सरकार</strong><br>पाठकों के समक्ष कॉफ़ी टेबल बुक को प्रस्तुत करते हुए मुझे अपार प्रसन्नता हो रही है। कला, संस्कृति और राजनीति के क्षेत्र के विविध रूप-रंगों का साक्षात्कार करने के बाद मुझे अनुभव होता है कि मेरे अंदर का कलाकार ब्रज में भ्रमण करने को आतुर रहता है। ब्रज के अतीत की कल्पना कर उन पलों को रंगमंच पर कभी अभिनय, कभी नृत्य तो कभी मधुर वाणी के माध्यम से साकार करने के प्रयास मुझे असीम आनंद देते हैं।</p><p>प्रभु की लीला भूमि ब्रज पर केंद्रित कॉफ़ी टेबल बुक का प्रकाशन इसी आनंद की एक कड़ी है।</p><p><strong>हेमा मालिनी</strong></p><p><strong>मुख्य संपादक 'चल मन वृन्दावन'</strong></p><figure class="image"><img src="https://www.frontlist.in/storage/ckeditor/1693818117_1692965799550.JPEG"></figure> ]]>
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        <language>en</language>
        <pubDate>Sat, 08 26, 2023 07:47 pm</pubDate>
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                <![CDATA[ बुक लॉन्च - चल मन वृन्दावन (कॉफ़ी टेबल बुक), जिसकी मुख्य संपादक श्रीमती हेमा मालिनी (सांसद, मथुरा) और संपादक डॉ. अशोक बंसल एवं श्री सुनील आचार्य ]]>
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            <link><![CDATA[ https://www.frontlist.in/public/bka-lnaca-cal-mana-vanathavana-ka-tabl-bka-jasaka-makhaya-sapathaka-sharamata-hama-malna-sasatha-mathara-oura-sapathaka-da-ashaka-bsal-eva-shara-sanal-aacaraya ]]></link>
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                <![CDATA[ <p><strong>पुस्तक के बारे में&nbsp;</strong></p><p>दो साल के परिश्रम के बाद कॉफ़ी टेबल बुक “चल मन वृंदावन” का प्रकाशन संभव हुआ है। मथुरा-वृंदावन की पावन भूमि युग पुरुष योगीराज श्रीकृष्ण और उनकी प्रेयसी राधा के कारण सम्पूर्ण विश्व में प्रचारित और पूजनीय है। 'श्रीमद्भागवत' जैसे पवित्र ग्रंथ में वर्णित श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न प्रेरक प्रसंगों ने जन-जन को उद्वेलित किया और इसी क्रम में महाकवि जयदेव के अद्भुत ग्रन्थ 'गीत गोविन्द' का प्रणयन हुआ। महाप्रभु चैतन्य, महाप्रभु वल्लभाचार्य जैसे समर्पित विद्वान भक्तों ने, विलुप्त हो चुके कृष्णकालीन वृंदावन व अन्य लीला-स्थलों का अपने तप और समर्पण से उद्धार किया</p><p>परिणामस्वरूप महकवि सूरदास, रसखान और मीरा सरीखे संत-कवियों ने अपनी प्रतिभा और वाणी से कृष्ण भक्ति के स्वरूप को एक नया रूप और नया अर्थ दिया। प्राचीन देवालयों का जीर्णोद्धार हुआ, नवीन पूजा स्थलों का निर्माण हुआ। इन्ही पूजास्थलों के माध्यम से कृष्णकालीन संस्कृति को नए आयामों के साथ नए कलेवर में परोसा गया। इससे ब्रज के तमाम देवालयों में आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के जीवन में आनंद और भक्ति का संचार हुआ।</p><p>इनके अतिरिक्त भगवान् बुद्ध, महावीर स्वामी, गुरुनानक, स्वामी विरजानन्द और दयानन्द सरीखे युगपुरुषों की उपस्थिति ने प्राचीन नगरी मथुरा के ऐतिहासिक महत्व को चरमोत्कर्ष पर पहुँचाया। आज ब्रज के कण-कण में हमारे पवित्र पुराणों और इतिहास को रोचक और रोमांचक कथाओं की अविरल धारा बह रही है। पुस्तक 'चल मन वृंदावन' के माध्यम से हमने तीर्थ यात्रिओं और पर्यटकों के समक्ष समग्र ब्रज की चित्रात्मक झाँकी प्रस्तुत करने का एक प्रयास किया है।</p><p><strong>डॉ. अशोक बंसल</strong></p><p><strong>संपादक</strong>&nbsp;</p><p><strong>शुभकामनायें</strong></p><p>अतीव हर्ष का विषय है कि ब्रज के विभिन्न सांस्कृतिक आयामों को एक कॉफ़ी टेबल बुक 'चल मन वृन्दावन' के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। यूँ तो ब्रज का सांस्कृतिक परिदृश्य अत्यंत विस्तृत है, किंतु इस पुस्तक को पांच विशेष खण्डों में विभाजित कर निहित सन्देश को सुस्पष्ट व सुग्राह्य बनाया गया है। इस सत्प्रयास के लिए श्रीमती हेमा मालिनी, डॉ. अशोक बंसल व उनके सहयोगी साधुवाद के पात्र हैं।</p><p>‘उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद’ के उद्देश्यों की सम्पूर्ति की दिशा में यह पुस्तक एक सशक्त पहल है।</p><p>मुझे विश्वास है कि पर्यटकों, ब्रज-रहस्य को जानने के उत्सुक श्रद्धालुओं तथा सामान्य तीर्थ यात्रिओं के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी एवं लोकप्रिय सिद्ध होगी।</p><p>कॉफ़ी टेबल बुक, 'चल मन वृन्दावन' के प्रकाशन के लिए 'उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद' की ओर से अनंत मंगलकामनाऐं ।</p><p><strong>शैलजा कांत मिश्र</strong></p><p>उपाध्यक्ष 'उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद्'</p><p><strong>कॉफ़ी टेबल बुक के आकर्षण: एक दृष्टि&nbsp;</strong></p><p><strong>ब्रज के इतिहास, संस्कृति, धर्म आदि विषयों का वर्गीकरण निम्न प्रकार किया गया है।</strong></p><p><strong>सम्पादकीय -</strong> मुख्य सम्पादक श्रीमती हेमा मालिनी ने 'चल मन वृंदावन' के प्रकाशन के विचार के जन्म, उद्देश्य और ब्रज के सांस्कृतिक महत्व को विस्तार से रेखांकित किया है।</p><p><strong>ब्रज के देवालय -&nbsp;</strong>लगभग पांच सौ वर्ष पूर्व विलुप्त वृंदावन की खोज महाप्रभु चैतन्य देव और उनके षड आचार्यों द्वारा की गई थी और फिर प्रारम्भ हुआ कृष्णकालीन वैभव को पुनः स्थापित करने का सिलसिला जो आज भी कायम है।</p><p>पुरातत्व विभाग के संरक्षण में प्राचीन मंदिरों का रखरखाव हो रहा है तो नवीन भव्य मंदिरों के निर्माण का क्रम जारी है। पुस्तक में उक्त सभी विवरण और ब्रज के प्रमुख देवालयों के निर्माण के इतिहास की चित्रात्मक व कलात्मक झांकी प्रस्तुत की गई है।</p><p><strong>ब्रज के उत्सव -&nbsp;</strong>ब्रज में राधा-कृष्ण के नाम की सर्वत्र गूँज है। 'श्रीमद्भागवत' में वर्णित श्रीकृष्ण की लीलाओं ने अनेकानेक उत्सवों को जन्म दिया है। परिणामस्वरूप, ब्रज के मंदिरों और विभिन्न स्थलों पर कृष्ण भक्तों को प्रतिदिन किसी न किसी उत्सव के नाम पर गाते, बजाते, झूमते और प्रसाद का रसास्वादन करते देखा जा सकता है। इन उत्सवों में ब्रज की होली के विभिन्न रूप तो विश्व प्रसिद्ध हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा कृष्णमय हो जाता है। चौरासी कोस की परिक्रमा, गोवर्धन परिक्रमा और यम द्वितीया के साथ रासलीला, कंस मेला आदि ब्रज के अनोखे पर्व हैं। इन उत्सवों का ऐतिहासिक विवरण पुस्तक का एक विशिष्ट आकर्षण है।</p><p><strong>ब्रज की धरोहर -</strong> विश्व के प्राचीन नगरों में मथुरा का प्रमुख स्थान है। मथुरा में महात्मा बुद्ध और महावीर स्वामी की मुलाक़ात प्रमाण के मिलते हैं। मथुरा का राजकीय संग्रहालय विगत ढाई हजार वर्षों के इतिहास, सभ्यता और संस्कृति की जीवंत पुस्तक है। इसके अतिरिक्त यहाँ की अन्य महत्वपूर्ण इमारत व स्थलों को भी इस पुस्तक में स्थान गया है।</p><p><strong>ब्रज की विभूतियाँ -&nbsp;</strong>महाप्रभु चैतन्य, महाप्रभु वल्लभाचार्य, श्रीहित हरिवंश, स्वामी हरिदास के साथ षड आचार्यों और अष्टछाप के कवियों, रसखान, मीराबाई और आधुनिक युग के स्वामी प्रभुपाद आदि के उल्लेख के बिना कृष्णकालीन ब्रज की चर्चा अधूरी है। इसके साथ, ऐसी अनेक विभूतियों को भी इस पुस्तक में स्थान दिया गया है जिन्हे पढ़कर पाठक आनंदित होता है और विस्मित भी।</p><p><strong>विविध सामग्री -&nbsp;</strong>मथुरा का पेड़ा और कृष्णकालीन मल्लविद्या पर शामिल किये गए आलेख भी कॉफ़ी टेबल बुक के अन्य आकर्षण हैं जो कृष्ण भक्तों और पर्यटकों में 'चल मन वृन्दावन' के विचार को जन्म देने के लिए पर्याप्त हैं और यही उद्देश्य है इस पुस्तक के प्रकाशन का।</p><p><strong>प्रधान मंत्री संदेश</strong></p><p>हमारी समृद्ध चिंतन परम्परा में भगवान् श्रीकृष्ण एक प्रकाश पुंज के समान है। उनकी लीलाओं की साक्षी मथुरा नगरी से जुड़े विभिन्न स्थान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। मथुरा की ऊर्जावान सांसद श्रीमती हेमा मालिनी जी के नेतृत्व में और डॉ. अशोक बंसल जी के प्रयासों से वृन्दावन, गोवर्धन, गोकुल, बरसाना व नंदगाव सहित मथुरा के विभिन्न गाँवों और कस्बों से जुड़े विभिन्न पहलुओं को लोगों तक पहुँचाने का यह प्रयास सराहनीय है।</p><p>मुझे विश्वास है कि कॉफ़ी टेबल बुक के माध्यम से ब्रज क्षेत्र की अनेक लोकोपयोगी व रोचक जानकारियां लोगों तक पहुंचेंगी।</p><p><strong>नरेन्द्र मोदी</strong></p><p><strong>प्रधानमंत्री, भारत सरकार</strong><br>पाठकों के समक्ष कॉफ़ी टेबल बुक को प्रस्तुत करते हुए मुझे अपार प्रसन्नता हो रही है। कला, संस्कृति और राजनीति के क्षेत्र के विविध रूप-रंगों का साक्षात्कार करने के बाद मुझे अनुभव होता है कि मेरे अंदर का कलाकार ब्रज में भ्रमण करने को आतुर रहता है। ब्रज के अतीत की कल्पना कर उन पलों को रंगमंच पर कभी अभिनय, कभी नृत्य तो कभी मधुर वाणी के माध्यम से साकार करने के प्रयास मुझे असीम आनंद देते हैं।</p><p>प्रभु की लीला भूमि ब्रज पर केंद्रित कॉफ़ी टेबल बुक का प्रकाशन इसी आनंद की एक कड़ी है।</p><p><strong>हेमा मालिनी</strong></p><p><strong>मुख्य संपादक 'चल मन वृन्दावन'</strong></p><figure class="image"><img src="https://www.frontlist.in/storage/ckeditor/1693818117_1692965799550.JPEG"></figure> ]]>
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            <pubDate>Sat, 08 26, 2023 07:47 pm</pubDate>
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